ग़ुस्से में अक्सर हम वो सब भी बोल जाते है जो शायद कभी बोलना ही नहीं चाहते थे

अलफ़ाज़ जो दिल से निकले और दिलों को छूले

ग़ुस्से में अक्सर हम वो सब भी बोल जाते है जो शायद कभी बोलना ही नहीं चाहते थे

 

ग़ुस्सा भी क्या भावना है जनाब अच्छे खासे खेलते रिश्तो को तोड़ने का दम रखती है।
अक्सर ग़ुस्सा में हम वो सब भी कह जाते है जो शयद हम कभी कहना नहीं चाहते थे या शायद वो सब कहना का हमारा इरादा भी न था मगर ये दो पल की घुसे के भावना में वो सब भी बयान कर जाते ह जो शायद रिश्तो की डोर को नाजुक कर देता है ।।

हां शायद ग़ुस्से में कही कुछ बाते सही भी होती है अक्सर ग़ुस्से में हम दूसरे इंसान की उन-खामिओ को बयान कर देते ह जो शायद वे भी सुन न नहीं चाहते।
लकिन कुछ बाटे घुसे में ये भी कहे जाते ह जो शायद सही न हो।।

लकिन ग़ुस्से में बोली गयी बातो को दिल पे न लेते हुए जो रिश्तो को महत्व दे व्ही सच्चा रिश्ता ह वर्ण जहां दो इंसान होंगे ग़ुस्सा कहा-सुनी तोह चलते रहेगी मगर इनसब बातो से रिश्तो की डोर मजबूत होना चाहिए कमजोर नहीं।।।

 

आपके प्यार की कद्र कोई पराया भी करेगा ,
लेकिन आपके गुस्से की कद्र केवल अपने ही करेंगे ।

 

 

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