ख़ामोशी भी अजीब है कही तोह एक अजीब सा रिश्ता बन जाती है

अलफ़ाज़ जो दिल से निकले और दिलों में समां गए।

ख़ामोशी भी अजीब है चीज़ है जनाब अगर रिश्तो में खामोसिया आजाये तोह रिश्तो की डोर नाजुक सी पढ़ने लग जाती है
वक्त रहते जितने भी गीले शिकवे दिल में हो वो बयान कर देना चाहिए अगर खामोशियों का साया रिश्तो पर हावी पढ़ने लगे

तोह रिश्ते कही न कही कमजोर पढ़ने लग ही जाते है।
हम इंसान है जनाब बिन बोले कुछ चीज़े समझ पाना मुश्किल है इसलिए दिल

दिमाग में जो भी हो उसे खुले मन से बयान कर देना चाहिए रिश्तो में कहती मीठी नोक

ज़ौक़ तोह आम बात है मगर खामोशियाँ नहीं।।

 

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