सुकून …..

अलफ़ाज़ जो दिल से निकले और दिलों में समां गए।

सुकून तभी मिलेगा।
जब न किसी से आशा होगी।।
और न किसी बात की निराशा होगी।।।

 

 

अक्सर हम लोगो से किसी न किसी बात की आशा रखते है और आशा रखना गलत भी नहीं है रिश्तो में हमे न चाहते हुए भी कुछ उम्मीदे कुछ आशाएं हो ही जाती है और अक्सर ये आशाएं ही निराशाओ का कारन भी बनती है।

लोगो से आशाएं रखना ठीक है लेकिन एक हद तक ही।
अगर कोई सख्श है जिस से सबसे ज्यादा आशाएं उम्मीदे रखनी चाहिए तोह है खुद आप।।

खुद पे भरोषा रखना खुद की उम्मीदों पे खरे उतरना ही जिंदगी है।।।

जीवन में शांति चाहिए तोह होसके उतनी कम आशायें ओरो से रखनी चाहिए।।।।

 

 

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