समय के साथ जख्म तोह भर जाते है जनाब।

अलफ़ाज़ जो दिल से निकले और दिलों में समां गए।

समय के साथ जख्म तोह भर जाते है जनाब।
मगर उनकी निशानियां बा जिंदगी साथ रहती है।।

 

वक्त का क्या है साहब वक्त किसी के लिए रुकता नहीं ,
समय के साथ कई जख्म भर जाते है जो हमारे अपनों ने हमे दिए हो ,
या जिन्हे हमने कभी अपना मन हो ।।

जख्म तोह भर जाते है ऊपर ऊपर से खुश तोह सभी दीखते है।
मगर ज़हन के अंदर जो चल रहा होता है वो शायद ही किसी को दीखता है।।

उन जख्मो की निशानियों के रूप में वो यादें हमारे साथ कही न कही हमेशा जिन्दा रहती है।
और जब कभी इन निशानियों को जब कभी थोड़ी भी आंच लगती ये बिलकुल ताज़ा होकर ज़हन झंझोड़ने लगती है।।

कुछ यादें अगर खुसी देती है तोह कुछ गमो में बादलो के बिच कही घूम सा कर देती है।
अक्सर कुछ पालो की यादें भोत तड़पती है।।

 

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