वो सफर बेहद ही सुहाना था जो हमने साथ में तय किया था।

अलफ़ाज़ जो दिल से निकले और दिलों को छूले

वो सफर बेहद ही सुहाना था जो हमने साथ में तय किया था।
न जाने वो कोनसा अजीब मोड़ आया।।
की अनगिनत गइलाह-सिखवाह लिए।
यूँ हम जुड़ा हुए।।

 

 

वो समय था बेहद ही सुहाना जिस वक्क्त थे हम-तुम साथ।
वो खट्टी मीठी नोकझोके , वो तेरा और मेरा तेरी परवाह करना ,
वो तेरा खुल के हसना , वो तेरी झूठी सी मुस्कान जो मेरा दिल रख लेती थी,
और न जाने कितने पल जो हम पास न होकर भी एक दूसरे के साथ गुजारे।।

जाने फिर कोनसा और क्यों ये जिंदगी ने रुख बदल लिया और हम यूँ जुड़ा हुए।
जिंदगी में लोग कही मिले और मिलेंगे शयद तुम हमसा कही और हम तुमसा कही न ढूंढ पाएंगे।।

काश के जिंदगी का रुख फिर कुछ यूँ बदले की हम-तुम फिर एक नई जिंदगी की किताब साथ मिलकर लिखे।

 

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