माँगा था किसी रोज जिसने हमे उसकी दुआओ में। न जाने आज किसकी बद्दुआ हमे उस से दूर ले आयी ।।

अलफ़ाज़ जो दिल से निकले और दिलों को छूले

माँगा था किसी रोज जिसने हमे उसकी दुआओ में।
न जाने आज किसकी बद्दुआ हमे उस से दूर ले आयी ।।

 

 

माँगा करती थी उस रब से अपनी हर दुआ में।
न जाने फिर किसकी यूँ बद्दुआ हमे लग गयी।।

यूँ बिछड़े हम के सोचा न था कभी।
यूँ तड़पे है तेरी यादो में दिन – रात।।

के पूछता उस रब से , की किया था क्या गलत मैंने किसी के साथ।
जो यूँ तन्हाइयो के दरिया में मुझे धकेल दिया गया।।

गर मिले खुदा कभी तोह पूछूंगा जरूर क्या उसकी दुआओ में कोई कमी थी या किसी की बद्दुआ ने हमे साथ होने न दिए।

देखे थे ख्वाब जिंदगी बिताने के साथ जिसके न जाने क्यों वो हमसे यूँ दूुर होगये।।

गर आये याद तुझे कभी तोह चले आना आज भी इस दिल के दरिया में सिर्फ तू ही तू है समय।
शायद हो रिश्ता हमारा कोई पुराण जो यूँ दूर होकर हम तुमसे दूर न हो पाए।।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.