भागति दौड़ती दुनिया सारी। ढूंढ़ते फिरती मूर्तिओ में भगवन सा कोई।।

बात कड़वी मगर सच्ची है

भागति दौड़ती दुनिया सारी।
ढूंढ़ते फिरती मूर्तिओ में भगवन सा कोई।।

मिले गर इंसान के वेश में भगवान सा कोई।
कदर न उसकी करे कोई ।।

 

इंसान भी कितने अजीब है साहब मूर्तिओ में भगवान ढूंढ़ते फ़िरते है।
मगर वे यह नहीं समझ पाते की जिस व्यक्ति ने आपके सबसे कठिन समय में आपका साथ दिया उसका दर्जा उस भगवान से भी बढ़कर है।।

मै ये नहीं कहता आस्था – श्रद्धा बुरी चीज़ है मगर इस से भी कई बढ़कर है उस जीवित व्यक्ति की कदर करना जिसने दिल से आपके कठिन समय में आपका साथ दिया हो , जिसने आप पर भरोसा किया हो।
मगर जाने न क्यों लोग उस वक्ती के साथ बाद में बुरा बर्ताव करते है जाने ये मनुस्य इतना स्वार्थी कैसे होगया।।

जो इंसान कठिन वक्त में साथ दे वो भगवान से बढ़कर है

 

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