बंधन रिश्तो का नही। एहसास का होता है ।।

अलफ़ाज़ जो दिल से निकले और दिलों में समां गए।

जनाब ये एहसास ही तोह है जो हमे एक दूसरे से बांधे रखता है।
गर प्यार हो मगर उसका एहसास ही ना हो तोह क्या वो प्यार मुक़ामाल हो पायेगा ।।


ये एहसास ही तोह है जो दूर होक भी उन्हें हमारे दिल के करीब रखता है ।
रिश्तो में चाहे हज़ारो फैसले आजाये मगर ये एहसास ही हमे उन फ़ासलो को मिटने में सहायक बनता है ।।


तेरा ज़िक्र…तेरी फ़िक्र.तेरा एहसास… तेरा ख्याल..!!! तू खुदा नही… फिर हर जगह मौजूद क्यूँ है…!!?

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