था कौन मेरा एक तू ही था

था कौन मेरा एक तू ही था
साँसों से ज़्यादा जो ज़रूरी था
तेरे लिए मैं कुछ नहीं लेकिन
मेरे लिए तू मेरा सब कुछ था

निगाहों से निगाहों की
मगर ख़्वाबों की दुनिया में
मिलूँगा तुमसे रोज़ाना
यहीं तक था सफ़र अपना
तुम्हें है लौट कर जाना
कभी मैं याद आऊँ तो…

 

हुए जुड़ा हमे बीत गया जमाना।
फिर भी न जाने क्यों तेरा वो एहसास आज भी है साथ मेरे।।

बिछड़ के भी न बिछड़ी तू मुझसे, ऐसा लगता है की है तू यही कहि।
भले ही हो दुरी कई मिलो की फिर भी न जाने क्यों कही न कही साथ तू ही है ।।

मांगू दुआए उस रब से किसी जहां में संगम हो फिर मेरा तुम्हारा।
होक जुड़ा भी जो एहसास न टूट सका लगन ऐसी लगी तुझसे।।

 

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