खुद पे से जिस वक्त तुम्हारा विश्वास उठने लग गया था।

अलफ़ाज़ जो दिल से निकले और दिलों में समां गए।

खुद पे से जिस वक्त तुम्हारा विश्वास उठने लग गया था।
अंदर से पूरी तरह से तुम टूट चुकी थी।

याद है न उस वक़्त किसी ने तुम पर तुम से से ज्यादा भरोसा किया था।
उसने तुम्हे तुम्हारी नज़रो में ही उठना सिखाया था।।

खुद पे भरोसा करना सिखाया था जिसने तुम्हे।
तुमने उसे ही अंधेरो भरी चार दीवारों में धकेल दिया।।

 

इतना आसान होता है क्या ज़िन्दगी में उस सख्स को ढूंढ पाना जो खुद से ज्यादा तुम पर विश्वास करे।
जो खुद से ज्यादा तुम्हारी परवाह करे।।

शयद आसान ही होगा इसलिए लोग अक्सर जो का उनकी दिल से कदर करते है उन्हें नज़र अंदाज़ कर देत्ते ह।
मगर याद रखना जो सख्स तुम्हे उस वक्त वक्त उठाता है जिस वक्त तुम्हारे पास और कोई नहीं होता।।
जो सख्स तुम्हे खुद पर भरोसा करना सिखाता है उस सख्स से कीमती और कोई तुम्हारी ज़िन्दगी में नहीं हो सकता।।।

वक्त वक्त की डोर है।
है गुलाम यह सब वक्त के।।
मगर जो न बदले रिश्ते वक्त के साथ भी।।।
वाकई सच्चा इंसान है।।।।

 

 

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