ऐसा क्यों होता है हम जिस से सबसे ज्यादा प्यार करते है। दुःख भी हम सबसे ज्यादा उसी को देते है।।

अलफ़ाज़ जो दिल से निकले और दिलों को छूले

ऐसा क्यों होता है हम जिस से सबसे ज्यादा प्यार करते है।

दुःख भी हम सबसे ज्यादा उसी को देते है।।

 

 

एहसासो में आज भी तू किसी हिसे में दिल के है जिन्दा।
चाहा न था कभी देना गम तुझे थोड़ा भी ,
चाहत थी मेरी देना तुझे हरदम खुसी ही ।।

यूँ तुझे देख उदास फिर भी तुझ से मांगी थी झूठी ही सही पर मुस्कान एक चेहरे पर तेरे।
क्युकी था मुझे यकीन उस झूठी सी मुस्कान को तेरे चेहरे की नित्य बना दूंगा।।

मगर जाने क्या ये समय का फेर चला जो हूँ अनकहिं सी बेफाक दूरियां यु होने जुड़ा कर गयी।
दिया दुःख तुझे पर भी दिल से चाह आज भी तेरी खुसी की ही है।।

 

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