अजनबी हो अजनबी बनकर ही पेस आऒ।

अलफ़ाज़ जो दिल से निकले और दिलों में समां गए।

जाने वो कोनसी पल था जब मिले थे हम।
जाने वो कोनसी घड़ी थी जब बिछड़ गए हम।।

भलाई दुरी कई हो मगर आज भी इस दिल के करीब हो तुम।
जाने लडू मै किस से इस दिल से जो मेरा होकर ही मेरा नहीं है।।

जाने क्यों दूर होकर भी तुज़ह से दूर ना हो सका जाने क्यों ये जिंदगी में यूँ मोड़ आया।।।

वक्त भोत ही दृढ़ होता है जो अपना है उसे अपने पास रखे।
वक्त रहते छोटे मोठे झगडे सुलझाने में ही बड़ापन है ये छोटे मोठे झगडे ही बादमे बड़ा रूप लेकर अच्छे खासे खेलते रिश्तो में दरार ले आते है।।
ना जाने क्यों हम गलतियों का सहारा लेकर रिश्तो को तोड़ देते है।
ये रिश्ते बड़े ही अनमोल होते है इन्हे दिल के करीब रखे जो है उनकी दिल से कदर करना ही प्यार है।।।

 

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