अक्सर वही रिश्ते खोखले होजाते है । जिनमे छोटी-छोटी बातो पर झगड़ा होने पर किसी तीसरे से राय ली जाती हो।।

बात कड़वी मगर सच्ची है

अक्सर वही रिश्ते खोखले होजाते है ।
जिनमे छोटी-छोटी बातो पर झगड़ा होने पर किसी तीसरे से राय ली जाती हो।।

 

जहा रिश्ते होते, जहा प्यार होता है , अक्सर वह अनबन , छोटी – मोटी नोकझोक होते रहती है।
मगर इन छोटी मोटी बातो में भी किसी तीसरे को शामिल किया जाये।।

दो लोग के बिच के छोटे मोठे झगड़ो में भी किसी तीसरे को शामिल किया जाये तोह अकसर उन रिश्तो की दूर नाजुक पढ़ने लग जाती है।
जहा दो लोग होते है वह अक्सर मतभेद होना स्वाभाविक है , मगर इन सब में किसी तीसरे को शामिल करना रिश्तो की नीव को हिला के रख देता है।।

रिश्ता हमारा है तोह उसे हमे ही सुलझाना चाहिए किसी तीसरे को इसमें शामिल करना बात को बढ़ावा देने के सामान होता है और रिश्तो में दरार
डालने क लिए यह काफी होता है।
उस तीसरे इंसान ने सिर्फ बात सुन कर अपना मत दिया होता है उसे उस परिष्तिथि का अहसास नहीं होता है।।

अक्सर लोग दो लोग के बिच में झगड़ो में किसी तीसरे को लेकर अचे खासे कीमती रिश्तो को खराब क़र देते है।
किसी से हमारा रिश्ता है तोह उन पर विश्वास रखना जरूरी है और बात बढ़ाने क बदला उसे सुलझाना जरूरी है रिश्ते जिंदगी का भोत कीमती हिंसा होता है इन्हे छोटी -मोटी बातो के वजह से खरब करना आपकी ही बदनसीबी है।।

हो सके तोह गर कभी आपके किसी रिश्तो में दरार आयी हो तोह उसे सुलझा लीजिये।
जो रिश्ते दिल से दिल तक जुड़े होते है उन रिश्तो को बचने के लिए कबि देर नहीं होती, समय आज भी है हो सके तोह अपने चाहने वालो को निराश क़र मरने न दीजिए आज वो जीवित है कल शायद हो न हो।।

— अलफ़ाज़__ए__रूह__

 

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